बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आजु दया दुखु दुसह सहावा। सुनि सौमित्र बिहसि सिरु नावा।।
मूल पाठ
आजु दया दुखु दुसह सहावा। सुनि सौमित्र बिहसि सिरु नावा।।
बाउ कृपा मूरति अनुकूला। बोलत बचन झरत जनु फूला।।
स्रोत अभिलेख 1.28 · पुस्तक पृ. 267, 268
भावार्थ
मूल पाठ के बादआज दया मुझे यह दु:सह दु:ख सहा रही है। यह सुनकर लक्ष्मणजीने मुसकराकर सिर नवाया [और कहा—] आपकी कृपारूपी वायु भी आपकी मूॢतके अनुकूल ही है, वचन बोलते हैं, मानो फूल झड़ रहे हैं!॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 267 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 आजु दया दुखु दुसह सहावा। सुनि सौमित्र बिहसि सिरु नावा।।
English explanation
Today compassion has made me endure unbearable pain. Hearing this, Lakshmana, Sumitra’s son, laughed and bowed his head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आजु | आज | today |
| दया | दया ने | compassion |
| दुखु | दुःख | pain |
| दुसह | असहनीय | unbearable |
| सहावा | सहने को विवश किया | made me endure |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सौमित्र | सुमित्रा के पुत्र लक्ष्मण | Lakshmana, Sumitra’s son |
| बिहसि | हँसकर | laughing |
| सिरु | सिर | head |
| नावा | झुकाया | bowed |
2 बाउ कृपा मूरति अनुकूला। बोलत बचन झरत जनु फूला।।
English explanation
Sir, you are kindness embodied and so gracious! As you speak, flowers seem to fall from your words!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बाउ | हे महाशय | sir |
| कृपा | दया की | of compassion |
| मूरति | साकार रूप | embodiment |
| अनुकूला | कृपालु, हितैषी | gracious, benevolent |
| बोलत | बोलते समय | while speaking |
| बचन | वचन | words |
| झरत | झरते हैं | fall |
| जनु | मानो | as though |
| फूला | फूल | flowers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 267
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 267, 268
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।