बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं पै कृपाँ जरिहिं मुनि गाता। क्रोध भएँ तनु राख बिधाता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे मुनि! यदि कृपा करनेसे आपका शरीर जला जाता है, तो क्रोध होनेपर तो शरीरकी रक्षा विधाता ही करेंगे। [परशुरामजीने कहा—] हे जनक! देख, यह मूर्ख बालक हठ करके यमपुरीमें घर (निवास) करना चाहता है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 268 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जौं पै कृपाँ जरिहिं मुनि गाता। क्रोध भएँ तनु राख बिधाता।।
देखु जनक हठि बालक एहू। कीन्ह चहत जड़ जमपुर गेहू।।
स्रोत अभिलेख 1.28 · पुस्तक पृ. 267, 268
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जौं पै कृपाँ जरिहिं मुनि गाता। क्रोध भएँ तनु राख बिधाता।।
English explanation
Sage, if your compassion itself makes bodies burn, may the Creator protect them when you grow angry!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| पै | ही, सचमुच | indeed |
| कृपाँ | कृपा से | through compassion |
| जरिहिं | जलेंगे | will burn |
| मुनि | हे मुनि | O sage |
| गाता | शरीर | bodies |
| क्रोध | क्रोध | anger |
| भएँ | होने पर | when it arises |
| तनु | शरीर की | the body |
| राख | रक्षा करें | may protect |
| बिधाता | विधाता, सृष्टिकर्ता | the Creator |
2 देखु जनक हठि बालक एहू। कीन्ह चहत जड़ जमपुर गेहू।।
English explanation
Janaka, look at this obstinate boy! The fool wants to make Yama’s city his home.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखु | देखो | look |
| जनक | हे राजा जनक | O King Janaka |
| हठि | हठी | obstinate |
| बालक | बालक | boy |
| एहू | यह | this |
| कीन्ह | बनाना | to make |
| चहत | चाहता है | wants |
| जड़ | मूर्ख | fool |
| जमपुर | यम की नगरी | Yama’s city, the realm of death |
| गेहू | घर | home |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 268
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 267, 268
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।