बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बरषहिं सुमन सुअंजलि साजी। गहगहि गगन दुंदुभी बाजी।।
मूल पाठ
बरषहिं सुमन सुअंजलि साजी। गहगहि गगन दुंदुभी बाजी।।
अस्तुति करहिं नाग मुनि देवा। बहुबिधि लावहिं निज निज सेवा।।
स्रोत अभिलेख 1.191 · पुस्तक पृ. 191, 192
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर सुन्दर अञ्जलियोंमें सजा-सजाकर पुष्प बरसाने लगे। आकाशमें घमाघम नगाड़े बजने लगे। नाग, मुनि और देवता स्तुति करने लगे और बहुत प्रकारसे अपनी-अपनी सेवा (उपहार) भेंट करने लगे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 192 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बरषहिं सुमन सुअंजलि साजी। गहगहि गगन दुंदुभी बाजी।।
English explanation
The gods showered flowers from beautifully prepared handfuls, while kettledrums resounded loudly in the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरषहिं | बरसाते हैं | shower down |
| सुमन | फूल | flowers |
| सुअंजलि | सुंदर, फूलों से भरी अंजलियाँ | lovely cupped handfuls of flowers |
| साजी | तैयार करके | having prepared |
| गहगहि | जोर से गूँजते हुए | with a loud resounding sound |
| गगन | आकाश में | in the sky |
| दुंदुभी | दुंदुभियाँ; नगाड़े | kettledrums |
| बाजी | बजीं | sounded |
2 अस्तुति करहिं नाग मुनि देवा। बहुबिधि लावहिं निज निज सेवा।।
English explanation
Serpent beings, sages, and gods offered praise and rendered their respective services in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस्तुति | स्तुति; प्रशंसा | praise |
| करहिं | करते हैं | offer; perform |
| नाग | नाग; दिव्य सर्प-जाति के प्राणी | divine serpent beings |
| मुनि | मुनि; ऋषि | sages |
| देवा | देवता | gods |
| बहुबिधि | अनेक प्रकार से | in many ways |
| लावहिं | अर्पित करते हैं; लगाते हैं | render; offer |
| निज | अपनी | their own |
| निज | अपनी-अपनी; प्रत्येक की अलग | each one's respective |
| सेवा | सेवा | service |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.191
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 192
- सहायक विषय
- राजा दशरथका पुत्रेष्टि यज्ञ, रानियोंका गर्भवती होना
- मुद्रित पृष्ठ
- 191, 192
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।