बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बनइ न बरनत बनी बराता। होहिं सगुन सुंदर सुभदाता।।
मूल पाठ
बनइ न बरनत बनी बराता। होहिं सगुन सुंदर सुभदाता।।
चारा चाषु बाम दिसि लेई। मनहुँ सकल मंगल कहि देई।।
स्रोत अभिलेख 1.303 · पुस्तक पृ. 286, 286
भावार्थ
मूल पाठ के बादबारात ऐसी बनी है कि उसका वर्णन करते नहीं बनता। सुन्दर शुभदायक शकुन हो रहे हैं। नीलकंठ पक्षी बायीं ओर चारा ले रहा है, मानो सम्पूर्ण मङ्गलोंकी सूचना दे रहा हो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 286 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बनइ न बरनत बनी बराता। होहिं सगुन सुंदर सुभदाता।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: The splendidly arrayed wedding procession is beyond description. Beautiful omens promising good fortune appear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बनइ | वर्णन संभव होता | can be adequately described |
| न | नहीं | not |
| बरनत | वर्णन करते हुए | in describing |
| बनी | सजी हुई | splendidly arrayed |
| बराता | बारात | wedding procession |
| होहिं | हो रहे हैं | are occurring |
| सगुन | शकुन | omens |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| सुभदाता | शुभ फल देने वाले | bestowing good fortune |
2 चारा चाषु बाम दिसि लेई। मनहुँ सकल मंगल कहि देई।।
English explanation
A blue jay takes food on the left, as though announcing every auspicious blessing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चारा | चारा; भोजन | food |
| चाषु | नीलकंठ पक्षी | Indian roller, the blue-jay bird |
| बाम | बाईं | left |
| दिसि | दिशा में | in the direction |
| लेई | ले रहा है | takes |
| मनहुँ | मानो | as though |
| सकल | समस्त | all |
| मंगल | मंगल; शुभ होने की बात | auspicious blessings |
| कहि | कहकर | by announcing |
| देई | दे रहा है | conveys |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.303
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 286
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 286, 286
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।