बालकाण्ड · दोहा 302 · दोहा/सोरठा
तुरग नचावहिं कुँअर बर अकनि मृदंग निसान।।
तुरग नचावहिं कुँअर बर अकनि मृदंग निसान।।
नागर नट चितवहिं चकित डगहिं न ताल बँधान।।302।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.302 · पुस्तक पृ. 285, 285
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तुरग नचावहिं कुँअर बर अकनि मृदंग निसान।।
श्रेष्ठ राजकुमार मृदंग और नगाड़ों की ध्वनि सुनकर घोड़ों को नचाते हैं।
English explanation
The noble princes make their horses dance to the sounds of the mridanga and kettledrums.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुरग | घोड़ों को | horses |
| नचावहिं | नचाते हैं | make dance |
| कुँअर | राजकुमार | princes |
| बर | श्रेष्ठ | noble; excellent |
| अकनि | सुनकर | on hearing |
| मृदंग | मृदंग की ध्वनि | the sound of the mridanga drum |
| निसान | नगाड़ों की ध्वनि | the sound of kettledrums |
2 नागर नट चितवहिं चकित डगहिं न ताल बँधान।।302।।
निपुण नट आश्चर्य से देखते हैं; घोड़ों के कदम ताल के बंधन से तनिक भी नहीं चूकते।
English explanation
Accomplished performers watch in amazement: the horses’ steps never stray from the prescribed rhythm.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नागर | चतुर; निपुण | accomplished; refined |
| नट | नट; नृत्य-कलाकार | performers; dancers |
| चितवहिं | देखते हैं | watch |
| चकित | आश्चर्यचकित होकर | in amazement |
| डगहिं | डगमगाते; चूकते हैं | falter; stray |
| न | नहीं | not |
| ताल | ताल के | of the rhythmic beat |
| बँधान | बंधे नियम से | from its prescribed pattern |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 302
- स्रोत अभिलेख
- 1.302
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 285, 285
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