बालकाण्ड · दोहा 303 · दोहा/सोरठा
मंगलमय कल्यानमय अभिमत फल दातार।
मंगलमय कल्यानमय अभिमत फल दातार।
जनु सब साचे होन हित भए सगुन एक बार।।303।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.303 · पुस्तक पृ. 286, 286
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1मंगलमय कल्यानमय अभिमत फल दातार।
ये शकुन मंगलमय, कल्याणमय और मनचाहे फल देने वाले हैं।
English explanation
These omens are full of auspiciousness and well-being, and grant desired results.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंगलमय | मंगल से पूर्ण | full of auspiciousness |
| कल्यानमय | कल्याण से पूर्ण | full of well-being |
| अभिमत | मनचाहा | desired |
| फल | फल; परिणाम | fruit; result |
| दातार | देने वाले | bestowers |
2 जनु सब साचे होन हित भए सगुन एक बार।।303।।
मानो सभी शकुन अपने संकेतों को सच्चा सिद्ध करने के लिए एक ही बार में प्रकट हो गए हों।
English explanation
It is as though all the omens appeared at once to make their promises come true.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनु | मानो | as though |
| सब | सभी | all |
| साचे | सत्य; सच सिद्ध | true; fulfilled |
| होन | होने | to become |
| हित | के लिए | for the purpose of |
| भए | प्रकट हुए | appeared |
| सगुन | शकुन | omens |
| एक | एक ही | one single |
| बार | बार; अवसर पर | occasion; time |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 303
- स्रोत अभिलेख
- 1.303
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 286, 286
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।