बालकाण्ड · दोहा 304 · दोहा/सोरठा
आवत जानि बरात बर सुनि गहगहे निसान।
आवत जानि बरात बर सुनि गहगहे निसान।
सजि गज रथ पदचर तुरग लेन चले अगवान।।304।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.304 · पुस्तक पृ. 286, 287
भावार्थ और शब्दार्थ
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1आवत जानि बरात बर सुनि गहगहे निसान।
उत्तम बरात को आता जानकर और नगाड़ों की गूँज सुनकर—
English explanation
Knowing that the splendid wedding procession was approaching and hearing the resounding kettledrums—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आवत | आती हुई | approaching |
| जानि | जानकर | knowing |
| बरात | विवाह की बरात | wedding procession |
| बर | उत्तम, शानदार | splendid; excellent |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| गहगहे | जोर से गूँजते हुए | resounding loudly |
| निसान | नगाड़े | kettledrums |
2 सजि गज रथ पदचर तुरग लेन चले अगवान।।304।।
अगवानी करने वाले हाथी, रथ, पैदल जन और घोड़े सजाकर बरात को लेने चले।
English explanation
The welcoming party set out to receive the procession, having arrayed elephants, chariots, people on foot, and horses.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सजि | सजाकर, तैयार करके | having arrayed; having prepared |
| गज | हाथी | elephants |
| रथ | रथ | chariots |
| पदचर | पैदल चलने वाले लोग | people on foot |
| तुरग | घोड़े | horses |
| लेन | लेने, स्वागत करके लाने के लिए | to receive and escort |
| चले | चल पड़े | set out |
| अगवान | अगवानी करने वाले | the welcoming party |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 304
- स्रोत अभिलेख
- 1.304
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 286, 287
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