बालकाण्ड · दोहा 301 · दोहा/सोरठा
तेहिं रथ रुचिर बसिष्ठ कहुँ हरषि चढ़ाइ नरेसु।
तेहिं रथ रुचिर बसिष्ठ कहुँ हरषि चढ़ाइ नरेसु।
आपु चढ़ेउ स्पंदन सुमिरि हर गुर गौरि गनेसु।।301।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.301 · पुस्तक पृ. 284, 285
भावार्थ और शब्दार्थ
1तेहिं रथ रुचिर बसिष्ठ कहुँ हरषि चढ़ाइ नरेसु।
राजा ने हर्षपूर्वक वसिष्ठ को उस सुंदर रथ पर चढ़ाया।
English explanation
The king joyfully seated Vashishtha in that beautiful chariot.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहिं | उस | that |
| रथ | रथ पर | in the chariot |
| रुचिर | सुंदर | beautiful |
| बसिष्ठ | राजगुरु वसिष्ठ | Vashishtha, the royal preceptor |
| कहुँ | को | marking the person seated |
| हरषि | हर्षित होकर | joyfully |
| चढ़ाइ | चढ़ाकर | having seated |
| नरेसु | राजा दशरथ | King Dasharatha |
2 आपु चढ़ेउ स्पंदन सुमिरि हर गुर गौरि गनेसु।।301।।
शिव, गुरु, गौरी और गणेश का स्मरण करके राजा स्वयं रथ पर चढ़े; ‘स्पंदन’ का पाठ यहाँ भी संदिग्ध है।
English explanation
Remembering Shiva, his guru, Gauri, and Ganesha, the king himself mounted the chariot; the reading ‘स्पंदन’ is again uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आपु | स्वयं | himself |
| चढ़ेउ | चढ़े | mounted |
| स्पंदन | रथ पर | the chariot |
| सुमिरि | स्मरण करके | having remembered |
| हर | भगवान शिव | Shiva |
| गुर | गुरु | his spiritual preceptor |
| गौरि | गौरी, देवी पार्वती | Gauri, the goddess Parvati |
| गनेसु | भगवान गणेश | Ganesha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 301
- स्रोत अभिलेख
- 1.301
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 284, 285
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।