बालकाण्ड · दोहा 300 · दोहा/सोरठा
सब कें उर निर्भर हरषु पूरित पुलक सरीर।
सब कें उर निर्भर हरषु पूरित पुलक सरीर।
कबहिं देखिबे नयन भरि रामु लखनू दोउ बीर।।300।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.3 · पुस्तक पृ. 283, 284
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सब कें उर निर्भर हरषु पूरित पुलक सरीर।
सबके हृदय में भरपूर हर्ष था और शरीर रोमांच से भरे थे।
English explanation
Everyone's heart brimmed with joy, and their bodies were covered with goosebumps of delight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सब | everyone |
| कें | के | of |
| उर | हृदय में | in the heart |
| निर्भर | भरपूर; अत्यधिक | abundant; intense |
| हरषु | आनंद | joy |
| पूरित | भरे हुए | filled |
| पुलक | आनंद के रोमांच से | with goosebumps of delight |
| सरीर | शरीर | bodies |
2 कबहिं देखिबे नयन भरि रामु लखनू दोउ बीर।।300।।
वे सोच रहे थे: कब हम राम और लक्ष्मण, दोनों वीरों को आँख भरकर देखेंगे?
English explanation
They wondered: When shall we gaze to our hearts' content upon the two heroes, Rama and Lakshmana?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कबहिं | कब | when |
| देखिबे | देखेंगे | shall we see |
| नयन | आँखें | eyes |
| भरि | भरकर; जी भरकर | to full satisfaction |
| रामु | राम को | Rama |
| लखनू | लक्ष्मण को | Lakshmana |
| दोउ | दोनों | both |
| बीर | वीरों को | heroes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 300
- स्रोत अभिलेख
- 1.3
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 283, 284
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