बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बड़े सनेह लघुन्ह पर करहीं। गिरि निज सिरनि सदा तृन धरहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दबड़े लोग छोटोंपर स्नेह करते ही हैं। पर्वत अपने सिरोंपर सदा तृण (घास) को धारण किये रहते हैं। अगाध समुद्र अपने मस्तकपर फेनको धारण करता है, और धरती अपने सिरपर सदा धूलिको धारण किये रहती है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 171 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बड़े सनेह लघुन्ह पर करहीं। गिरि निज सिरनि सदा तृन धरहीं।।
जलधि अगाध मौलि बह फेनू। संतत धरनि धरत सिर रेनू।।
स्रोत अभिलेख 1.167 · पुस्तक पृ. 170, 171
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बड़े सनेह लघुन्ह पर करहीं। गिरि निज सिरनि सदा तृन धरहीं।।
English explanation
The great show affection toward the small; mountains always bear grass upon their summits.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बड़े | बड़े लोग | the great |
| सनेह | स्नेह | affection |
| लघुन्ह | छोटों | the small or humble |
| पर | पर; के प्रति | toward |
| करहीं | करते हैं | show; do |
| गिरि | पर्वत | mountains |
| निज | अपने | their own |
| सिरनि | सिरों पर; शिखरों पर | upon their heads or summits |
| सदा | सदा | always |
| तृन | घास | grass |
| धरहीं | धारण करते हैं | bear |
2 जलधि अगाध मौलि बह फेनू। संतत धरनि धरत सिर रेनू।।
English explanation
The unfathomable ocean bears foam upon its head, and the earth continually bears dust upon its head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जलधि | समुद्र | the ocean |
| अगाध | अथाह | unfathomable |
| मौलि | सिर पर | upon its head |
| बह | वहन करता है | bears |
| फेनू | फेन; झाग | foam |
| संतत | निरंतर | continually |
| धरनि | पृथ्वी | the earth |
| धरत | धारण करती है | bears |
| सिर | सिर पर | upon its head |
| रेनू | धूल | dust |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.167
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 171
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 170, 171
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।