बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं न जाउँ तव होइ अकाजू। बना आइ असमंजस आजू।।
मूल पाठ
जौं न जाउँ तव होइ अकाजू। बना आइ असमंजस आजू।।
सुनि महीस बोलेउ मृदु बानी। नाथ निगम असि नीति बखानी।।
स्रोत अभिलेख 1.167 · पुस्तक पृ. 170, 171
भावार्थ
मूल पाठ के बादपरंतु यदि नहीं जाता हूँ, तो तुम्हारा काम बिगड़ता है। आज यह बड़ा असमंजस आ पड़ा है। यह सुनकर राजा कोमल वाणीसे बोला, हे नाथ! वेदोंमें ऐसी नीति कही है कि—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 170 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जौं न जाउँ तव होइ अकाजू। बना आइ असमंजस आजू।।
English explanation
If I do not go, your undertaking will fail; this dilemma has arisen today.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| न | नहीं | not |
| जाउँ | मैं जाऊँ | I go |
| तव | तुम्हारा | your |
| होइ | हो जाएगा | will become |
| अकाजू | काम का बिगाड़ | failure of the undertaking |
| बना | उत्पन्न हुआ; आ पड़ा | has arisen |
| आइ | आकर | having come |
| असमंजस | दुविधा | dilemma |
| आजू | आज | today |
2 सुनि महीस बोलेउ मृदु बानी। नाथ निगम असि नीति बखानी।।
English explanation
Hearing this, the king spoke gently: ‘O lord, the Vedas have declared this principle.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| महीस | राजा | the king |
| बोलेउ | बोले | spoke |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी में | in speech |
| नाथ | हे नाथ | O lord |
| निगम | वेदों ने | the Vedas |
| असि | ऐसी | such |
| नीति | आचरण की नीति | principle of conduct |
| बखानी | कही है | have declared |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.167
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 170
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 170, 171
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।