बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
फिरत बिपिन आश्रम एक देखा। तहँ बस नृपति कपट मुनिबेषा।।
मूल पाठ
फिरत बिपिन आश्रम एक देखा। तहँ बस नृपति कपट मुनिबेषा।।
जासु देस नृप लीन्ह छड़ाई। समर सेन तजि गयउ पराई।।
स्रोत अभिलेख 1.158 · पुस्तक पृ. 163, 163
भावार्थ
मूल पाठ के बादवनमें फिरते-फिरते उसने एक आश्रम देखा; वहाँ कपटसे मुनिका वेष बनाये एक राजा रहता था, जिसका देश राजा प्रतापभानुने छीन लिया था और जो सेनाको छोड़कर युद्धसे भाग गया था॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 163 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 फिरत बिपिन आश्रम एक देखा। तहँ बस नृपति कपट मुनिबेषा।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: While wandering in the forest, the king saw a hermitage. Another king lived there, deceitfully disguised as a sage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फिरत | घूमते हुए | while wandering |
| बिपिन | वन में | in the forest |
| आश्रम | तपस्वियों का निवास | a hermitage |
| एक | एक | one |
| देखा | देखा | saw |
| तहँ | वहाँ | there |
| बस | रहता था | dwelt |
| नृपति | एक अन्य राजा | another king |
| कपट | छलपूर्वक | deceitfully |
| मुनिबेषा | मुनि के वेश में | in a sage’s disguise |
2 जासु देस नृप लीन्ह छड़ाई। समर सेन तजि गयउ पराई।।
English explanation
This was the king whose kingdom Pratapabhanu had seized; he had abandoned his army in battle and fled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिसका | whose |
| देस | राज्य | kingdom |
| नृप | राजा प्रतापभानु ने | King Pratapabhanu |
| लीन्ह | ले लिया था | had taken |
| छड़ाई | छीनकर | by dispossessing him |
| समर | युद्ध में | in battle |
| सेन | सेना | his army |
| तजि | छोड़कर | having abandoned |
| गयउ | चला गया | went away |
| पराई | भागकर | fleeing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.158
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 163
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 163, 163
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।