बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रथम बरात लगन तें आई। तातें पुर प्रमोदु अधिकाई।।
मूल पाठ
प्रथम बरात लगन तें आई। तातें पुर प्रमोदु अधिकाई।।
ब्रह्मानंदु लोग सब लहहीं। बढ़हुँ दिवस निसि बिधि सन कहहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.309 · पुस्तक पृ. 290, 291
भावार्थ
मूल पाठ के बादबारात लग्नके दिनसे पहले आ गयी है, इससे जनकपुरमें अधिक आनन्द छा रहा है। सब लोग ब्रह्मानन्द प्राप्त कर रहे हैं और विधातासे मनाकर कहते हैं कि दिन-रात बढ़ जायँ (बड़े हो जायँ)॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 291 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रथम बरात लगन तें आई। तातें पुर प्रमोदु अधिकाई।।
English explanation
The wedding party arrived before the appointed wedding time, so the city's joy increased.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रथम | पहले | before |
| बरात | बरात | the wedding party |
| लगन | विवाह का निश्चित मुहूर्त | the appointed auspicious wedding time |
| तें | से | than; relative to |
| आई | आ गई | arrived |
| तातें | इसलिए | therefore |
| पुर | नगर में | in the city |
| प्रमोदु | आनंद | joy |
| अधिकाई | अधिक हो गया | increased |
2 ब्रह्मानंदु लोग सब लहहीं। बढ़हुँ दिवस निसि बिधि सन कहहीं।।
English explanation
Everyone experiences the bliss of Brahman and says to the Creator, 'May the days and nights grow longer.'
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रह्मानंदु | ब्रह्म का परम आनंद | the supreme bliss of Brahman |
| लोग | लोग | people |
| सब | सभी | all |
| लहहीं | प्राप्त करते हैं | experience; obtain |
| बढ़हुँ | बढ़ें; लंबे हों | may grow longer |
| दिवस | दिन | days |
| निसि | रातें | nights |
| बिधि | विधाता; सृष्टिकर्ता | the Creator |
| सन | से | to |
| कहहीं | कहते हैं | say |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.309
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 291
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 290, 291
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।