बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रथमहिं गिरि बहु गृह सँवराए। जथाजोगु तहँ तहँ सब छाए।।
मूल पाठ
प्रथमहिं गिरि बहु गृह सँवराए। जथाजोगु तहँ तहँ सब छाए।।
पुर सोभा अवलोकि सुहाई। लागइ लघु बिरंचि निपुनाई।।
स्रोत अभिलेख 1.94 · पुस्तक पृ. 108, 108
भावार्थ
मूल पाठ के बादहिमाचलने पहलेहीसे बहुत-से घर सजवा रखे थे। यथायोग्य उन-उन स्थानोंमें सब लोग उतर गये। नगरकी सुन्दर शोभा देखकर ब्रह्माकी रचना-चातुरी भी तुच्छ लगती थी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 108 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 प्रथमहिं गिरि बहु गृह सँवराए। जथाजोगु तहँ तहँ सब छाए।।
English explanation
Himalaya had already prepared and decorated many houses. Everyone settled in the places appropriate for them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रथमहिं | पहले ही | already, beforehand |
| गिरि | पर्वतराज हिमालय ने | Himalaya, the mountain king |
| बहु | बहुत-से | many |
| गृह | घर | houses |
| सँवराए | सजवाए, तैयार करवाए | had decorated and prepared |
| जथाजोगु | जिसके लिए जैसा उचित था | as appropriate for each |
| तहँ | वहाँ | there |
| तहँ | वहाँ, उन-उन स्थानों पर | in their respective places |
| सब | सभी | everyone |
| छाए | ठहर गए | settled in |
2 पुर सोभा अवलोकि सुहाई। लागइ लघु बिरंचि निपुनाई।।
English explanation
Seeing the city’s lovely splendor, even Brahma’s creative skill seems small by comparison.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुर | नगर की | of the city |
| सोभा | शोभा | splendor |
| अवलोकि | देखकर | upon seeing |
| सुहाई | मनोहर | lovely |
| लागइ | लगती है | seems |
| लघु | छोटी, कमतर | small, lesser |
| बिरंचि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा की | of Brahma, the creator |
| निपुनाई | कुशलता | creative skill |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.94
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 108
- सहायक विषय
- शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 108, 108
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।