बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुर जन आवत अकनि बराता। मुदित सकल पुलकावलि गाता।।
मूल पाठ
पुर जन आवत अकनि बराता। मुदित सकल पुलकावलि गाता।।
निज निज सुंदर सदन सँवारे। हाट बाट चौहट पुर द्वारे।।
स्रोत अभिलेख 1.344 · पुस्तक पृ. 326, 327
भावार्थ
मूल पाठ के बादबारातको आती हुई सुनकर नगरनिवासी प्रसन्न हो गये। सबके शरीरोंपर पुलकावली छा गयी। सबने अपने-अपने सुन्दर घरों, बाजारों, गलियों, चौराहों और नगरके द्वारोंको सजाया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 326 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पुर जन आवत अकनि बराता। मुदित सकल पुलकावलि गाता।।
English explanation
Hearing that the wedding procession was arriving, all the townspeople rejoiced, their bodies thrilling with goosebumps.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुर | नगर के | of the town |
| जन | लोग | people |
| आवत | आती हुई | arriving |
| अकनि | सुनकर | having heard |
| बराता | बरात | wedding procession |
| मुदित | आनंदित | delighted |
| सकल | सभी | all |
| पुलकावलि | रोमांच की पंक्तियाँ | rows of goosebumps |
| गाता | शरीरों पर | on their bodies |
2 निज निज सुंदर सदन सँवारे। हाट बाट चौहट पुर द्वारे।।
English explanation
People decorated their own beautiful homes, as well as the markets, roads, crossroads, and city gates.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने | respective |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| सदन | घर | homes |
| सँवारे | सजाए | decorated |
| हाट | बाजार | markets |
| बाट | रास्ते | roads |
| चौहट | चौराहे | crossroads |
| पुर | नगर के | of the city |
| द्वारे | द्वार | gates |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.344
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 326
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 326, 327
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।