बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गलीं सकल अरगजाँ सिंचाई। जहँ तहँ चौकें चारु पुराई।।
मूल पाठ
गलीं सकल अरगजाँ सिंचाई। जहँ तहँ चौकें चारु पुराई।।
बना बजारु न जाइ बखाना। तोरन केतु पताक बिताना।।
स्रोत अभिलेख 1.344 · पुस्तक पृ. 326, 327
भावार्थ
मूल पाठ के बादसारी गलियाँ अरगजेसे सिंचायी गयीं, जहाँ-तहाँ सुन्दर चौक पुराये गये। तोरणों, ध्वजा- पताकाओं और मण्डपोंसे बाजार ऐसा सजा कि जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 327 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 गलीं सकल अरगजाँ सिंचाई। जहँ तहँ चौकें चारु पुराई।।
English explanation
All the lanes were sprinkled with fragrant aragaja, and beautiful auspicious floor designs were made everywhere.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गलीं | गलियाँ | lanes |
| सकल | सभी | all |
| अरगजाँ | सुगंधित अरगजा मिश्रण से | with fragrant aragaja mixture |
| सिंचाई | सींची गईं | were sprinkled |
| जहँ | जहाँ | where |
| तहँ | तहाँ | there |
| चौकें | मांगलिक भूमि-अलंकरण | auspicious floor designs |
| चारु | सुंदर | beautiful |
| पुराई | बनाए गए | were drawn and filled in |
2 बना बजारु न जाइ बखाना। तोरन केतु पताक बिताना।।
English explanation
The market was decorated beyond description, with festoons, flags, pennants, and canopies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बना | सजा हुआ | adorned |
| बजारु | बाजार | market |
| न | नहीं | not |
| जाइ | किया जा सकता | can be |
| बखाना | वर्णन | described |
| तोरन | सजावटी तोरण | decorative festoons |
| केतु | ध्वज | flags |
| पताक | पताकाएँ | pennants |
| बिताना | चँदोवे | canopies |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.344
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 327
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 326, 327
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।