बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुरी बिराजति राजति रजनी। रानीं कहहिं बिलोकहु सजनी।।
मूल पाठ
पुरी बिराजति राजति रजनी। रानीं कहहिं बिलोकहु सजनी।।
सुंदर बधुन्ह सासु लै सोई। फनिकन्ह जनु सिरमनि उर गोई।।
स्रोत अभिलेख 1.358 · पुस्तक पृ. 337, 338
भावार्थ
मूल पाठ के बादरानियाँ कहती हैं—हे सजनी! देखो, [आज] रात्रिकी कैसी शोभा है, जिससे अयोध्यापुरी विशेष शोभित हो रही है! [यों कहती हुई] सासुएँ सुन्दर बहुओंको लेकर सो गयीं, मानो सर्पोंने अपने सिरकी मणियोंको हृदयमें छिपा लिया है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 338 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पुरी बिराजति राजति रजनी। रानीं कहहिं बिलोकहु सजनी।।
English explanation
The city is splendid, and the night is lovely. The queens say, ‘Look, dear friend!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुरी | नगरी | city |
| बिराजति | शोभित है | is splendid |
| राजति | सुशोभित है | is radiant |
| रजनी | रात्रि | night |
| रानीं | रानियाँ | queens |
| कहहिं | कहती हैं | say |
| बिलोकहु | देखो | look; behold |
| सजनी | हे सखी | dear friend |
2 सुंदर बधुन्ह सासु लै सोई। फनिकन्ह जनु सिरमनि उर गोई।।
English explanation
The mothers-in-law slept with the lovely brides beside them, as though serpents had tucked their head-jewels close to their hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| बधुन्ह | बहुओं को | the daughters-in-law |
| सासु | सासें | mothers-in-law |
| लै | साथ लेकर | taking beside them |
| सोई | सो गईं | went to sleep |
| फनिकन्ह | नागों ने | the serpents |
| जनु | मानो | as though |
| सिरमनि | सिर की मणि | head-jewel |
| उर | हृदय में; छाती से लगाकर | close to the heart |
| गोई | छिपा ली | concealed; tucked away |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.358
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 338
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 337, 338
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।