बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रात पुनीत काल प्रभु जागे। अरुनचूड़ बर बोलन लागे।।
मूल पाठ
प्रात पुनीत काल प्रभु जागे। अरुनचूड़ बर बोलन लागे।।
बंदि मागधन्हि गुनगन गाए। पुरजन द्वार जोहारन आए।।
स्रोत अभिलेख 1.358 · पुस्तक पृ. 337, 338
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रात:काल पवित्र ब्राह्ममुहूर्तमें प्रभु जागे। मुर्गे सुन्दर बोलने लगे। भाट और मागधोंने गुणोंका गान किया तथा नगरके लोग द्वारपर जोहार करनेको आये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 338 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 प्रात पुनीत काल प्रभु जागे। अरुनचूड़ बर बोलन लागे।।
English explanation
The Lord awoke at the sacred morning hour; fine red-crested roosters began to crow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रात | प्रातः | in the morning |
| पुनीत | पवित्र | sacred |
| काल | समय में | at the hour |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| जागे | जागे | awoke |
| अरुनचूड़ | लाल कलगी वाले मुर्गे | red-crested roosters |
| बर | सुंदर, उत्तम | fine; handsome |
| बोलन | बाँग देने | to crow |
| लागे | लगे | began |
2 बंदि मागधन्हि गुनगन गाए। पुरजन द्वार जोहारन आए।।
English explanation
Court panegyrists and genealogical bards sang praises of his many virtues; townspeople came to the gate to pay their respects.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदि | बंदीजनों ने | court panegyrists |
| मागधन्हि | मागध गायकों ने | genealogical bards |
| गुनगन | गुणों के समूह | the many virtues |
| गाए | गाए | sang |
| पुरजन | नगरवासी | townspeople |
| द्वार | द्वार पर | to the gate |
| जोहारन | प्रणाम करने | to pay respects |
| आए | आए | came |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.358
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 338
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 337, 338
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।