बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नीदउँ बदन सोह सुठि लोना। मनहुँ साँझ सरसीरुह सोना।।
मूल पाठ
नीदउँ बदन सोह सुठि लोना। मनहुँ साँझ सरसीरुह सोना।।
घर घर करहिं जागरन नारीं। देहिं परसपर मंगल गारीं।।
स्रोत अभिलेख 1.358 · पुस्तक पृ. 337, 338
भावार्थ
मूल पाठ के बादनींदमें भी उनका अत्यन्त सलोना मुखड़ा ऐसा सोह रहा था, मानो सन्ध्याके समयका लाल कमल सोह रहा हो। स्त्रियाँ घर-घर जागरण कर रही हैं और आपसमें (एक-दूसरीको) मङ्गलमयी गालियाँ दे रही हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 337 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नीदउँ बदन सोह सुठि लोना। मनहुँ साँझ सरसीरुह सोना।।
English explanation
AI draft: The lovely, sleepy face is most radiant, like a lotus asleep at dusk.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नीदउँ | नींद से भरा | sleepy; drowsy |
| बदन | मुख | face |
| सोह | शोभित होता है | shines beautifully |
| सुठि | बहुत | very |
| लोना | सुंदर, सलोना | lovely; charming |
| मनहुँ | मानो | as though |
| साँझ | संध्या में | at dusk |
| सरसीरुह | कमल | lotus |
| सोना | सोया हुआ | asleep |
2 घर घर करहिं जागरन नारीं। देहिं परसपर मंगल गारीं।।
English explanation
Women keep festive night vigils in every home and exchange playful, auspicious teasing songs.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| घर | घर | home |
| घर | घर; प्रत्येक घर में | home; in every home |
| करहिं | करती हैं | perform |
| जागरन | रात्रि-जागरण | night vigil |
| नारीं | स्त्रियाँ | women |
| देहिं | देती हैं | give; exchange |
| परसपर | एक-दूसरे को | with one another |
| मंगल | मंगल अवसर की | for the auspicious celebration |
| गारीं | हँसी-ठिठोली की गालियाँ | playful teasing verses |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.358
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 337
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 337, 338
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।