बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि प्रभु कहहु राम अवतारा। बालचरित पुनि कहहु उदारा।।
मूल पाठ
पुनि प्रभु कहहु राम अवतारा। बालचरित पुनि कहहु उदारा।।
कहहु जथा जानकी बिबाहीं। राज तजा सो दूषन काहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.11 · पुस्तक पृ. 123, 124
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर हे प्रभु! श्रीरामचन्द्रजीके अवतार (जन्म) की कथा कहिये तथा उनका उदार बालचरित्र कहिये। फिर जिस प्रकार उन्होंने श्रीजानकीजीसे विवाह किया, वह कथा कहिये और फिर यह बतलाइये कि उन्होंने जो राज्य छोड़ा सो किस दोषसे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 123 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पुनि प्रभु कहहु राम अवतारा। बालचरित पुनि कहहु उदारा।।
English explanation
Then, my lord, describe Rama’s incarnation, and then recount his noble childhood deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| प्रभु | हे स्वामी शिव | O lord Shiva |
| कहहु | कहिए | recount |
| राम | भगवान राम का | of Lord Rama |
| अवतारा | अवतार; जन्म लेकर प्रकट होना | incarnation; appearance through birth |
| बालचरित | बचपन के चरित्र और कार्य | childhood deeds |
| पुनि | फिर | then |
| कहहु | कहिए | recount |
| उदारा | श्रेष्ठ और उदात्त | noble and exalted |
2 कहहु जथा जानकी बिबाहीं। राज तजा सो दूषन काहीं।।
English explanation
Tell how Rama married Janaki, and what fault or cause led him to relinquish the kingdom.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहु | बताइए | tell |
| जथा | जिस प्रकार; कैसे | how |
| जानकी | जनक की पुत्री सीता से | Janaki, Sita, daughter of Janaka |
| बिबाहीं | विवाह किया | married |
| राज | राज्य | the kingdom |
| तजा | त्याग दिया | relinquished |
| सो | वह | that |
| दूषन | दोष; प्रतिकूल कारण | fault; adverse cause |
| काहीं | किस कारण से | on what account |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 123
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 123, 124
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।