बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति आरति पूछउँ सुरराया। रघुपति कथा कहहु करि दाया।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे देवताओंके स्वामी! मैं बहुत ही आर्तभाव (दीनता) से पूछती हूँ, आप मुझपर दया करके श्रीरघुनाथजीकी कथा कहिये। पहले तो वह कारण विचारकर बतलाइये जिससे निर्गुण ब्रह्म सगुण रूप धारण करता है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 123 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अति आरति पूछउँ सुरराया। रघुपति कथा कहहु करि दाया।।
प्रथम सो कारन कहहु बिचारी। निर्गुन ब्रह्म सगुन बपु धारी।।
स्रोत अभिलेख 1.11 · पुस्तक पृ. 123, 124
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अति आरति पूछउँ सुरराया। रघुपति कथा कहहु करि दाया।।
English explanation
Lord of the gods, I ask with intense longing; kindly tell me the story of Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | intense |
| आरति | व्याकुल उत्कंठा से | with yearning |
| पूछउँ | मैं पूछती हूँ | I ask |
| सुरराया | हे देवों के स्वामी शिव | O Shiva, lord of the gods |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम की | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| कथा | कथा | story |
| कहहु | कहिए | please tell |
| करि | करके | showing |
| दाया | दया | compassion |
2 प्रथम सो कारन कहहु बिचारी। निर्गुन ब्रह्म सगुन बपु धारी।।
English explanation
First, explain thoughtfully why the attributeless Absolute assumed an embodied form with attributes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रथम | पहले | first |
| सो | वह | that |
| कारन | कारण | reason |
| कहहु | बताइए | please explain |
| बिचारी | विचार करके | after considering |
| निर्गुन | गुणों से रहित | without attributes |
| ब्रह्म | परम सत्य ब्रह्म | the Absolute |
| सगुन | गुणों सहित | with attributes |
| बपु | शरीर | body |
| धारी | धारण किया | assumed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 123
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 123, 124
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।