बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जदपि जोषिता नहिं अधिकारी। दासी मन क्रम बचन तुम्हारी।।
मूल पाठ
जदपि जोषिता नहिं अधिकारी। दासी मन क्रम बचन तुम्हारी।।
गूढ़उ तत्व न साधु दुरावहिं। आरत अधिकारी जहँ पावहिं।।
स्रोत अभिलेख 1.11 · पुस्तक पृ. 123, 124
भावार्थ
मूल पाठ के बादयद्यपि स्त्री होनेके कारण मैं उसे सुननेकी अधिकारिणी नहीं हूँ, तथापि मैं मन, वचन और कर्मसे आपकी दासी हूँ। संत लोग जहाँ आर्त अधिकारी पाते हैं, वहाँ गूढ़ तत्त्व भी उससे नहीं छिपाते॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 123 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जदपि जोषिता नहिं अधिकारी। दासी मन क्रम बचन तुम्हारी।।
English explanation
Although a woman is not considered eligible for this knowledge, I am your servant in thought, deed, and speech.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जदपि | यद्यपि | although |
| जोषिता | स्त्री | a woman |
| नहिं | नहीं | not |
| अधिकारी | इस ज्ञान की पात्र | eligible for this knowledge |
| दासी | सेविका | female servant |
| मन | मन से | in thought |
| क्रम | कर्म से | in deed |
| बचन | वचन से | in speech |
| तुम्हारी | आपकी | your |
2 गूढ़उ तत्व न साधु दुरावहिं। आरत अधिकारी जहँ पावहिं।।
English explanation
Where holy people find a distressed yet eligible seeker, they do not conceal even profound truth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गूढ़उ | गूढ़ भी | even profound |
| तत्व | तत्त्व; वास्तविक सत्य | essential truth |
| न | नहीं | not |
| साधु | संतजन | holy people |
| दुरावहिं | छिपाते हैं | conceal |
| आरत | व्याकुल जिज्ञासु | a distressed, yearning seeker |
| अधिकारी | ज्ञान पाने का पात्र | eligible to receive knowledge |
| जहँ | जहाँ | where |
| पावहिं | पाते हैं | find |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 123
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 123, 124
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।