बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि पुनि मिलति परति गहि चरना। परम प्रेम कछु जाइ न बरना।।
मूल पाठ
पुनि पुनि मिलति परति गहि चरना। परम प्रेम कछु जाइ न बरना।।
सब नारिन्ह मिलि भेटि भवानी। जाइ जननि उर पुनि लपटानी।।
स्रोत अभिलेख 1.102 · पुस्तक पृ. 116, 116
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैना बार-बार मिलती हैं और [पार्वतीके] चरणोंको पकड़कर गिर पड़ती हैं। बड़ा ही प्रेम है, कुछ वर्णन नहीं किया जाता। भवानी सब स्त्रियोंसे मिल-भेंटकर फिर अपनी माताके हृदयसे जा लिपटीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 116 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पुनि पुनि मिलति परति गहि चरना। परम प्रेम कछु जाइ न बरना।।
English explanation
Uma repeatedly embraced her mother and bowed down, clasping her feet. That profound love cannot be described at all.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| मिलति | माता से मिलतीं | embraced her mother |
| परति | झुक पड़तीं | bowed down |
| गहि | पकड़कर | clasping |
| चरना | माता के चरण | her mother’s feet |
| परम | अत्यंत गहरा | profound |
| प्रेम | प्रेम | love |
| कछु | कुछ भी | at all |
| जाइ | किया जा सकता | can be |
| न | नहीं | not |
| बरना | वर्णन | described |
2 सब नारिन्ह मिलि भेटि भवानी। जाइ जननि उर पुनि लपटानी।।
English explanation
After meeting and embracing all the women, Bhavani went back and clung once more to her mother’s breast.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| नारिन्ह | स्त्रियों से | the women |
| मिलि | मिलकर | having met |
| भेटि | गले लगकर | having embraced |
| भवानी | पार्वती | Bhavani, Parvati |
| जाइ | जाकर | having gone |
| जननि | माता के | her mother’s |
| उर | हृदय से | to her breast |
| पुनि | फिर | again |
| लपटानी | लिपट गईं | clung |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.102
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 116
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 116, 116
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।