बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कत बिधि सृजीं नारि जग माहीं। पराधीन सपनेहुँ सुखु नाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[फिर बोलीं कि] विधाताने जगत्में स्त्रीजातिको क्यों पैदा किया? पराधीनको सपनेमें भी सुख नहीं मिलता। यों कहती हुई माता प्रेममें अत्यन्त विकल हो गयी, परन्तु कुसमय जानकर (दु:ख करनेका अवसर न जानकर) उन्होंने धीरज धरा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 116 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कत बिधि सृजीं नारि जग माहीं। पराधीन सपनेहुँ सुखु नाहीं।।
भै अति प्रेम बिकल महतारी। धीरजु कीन्ह कुसमय बिचारी।।
स्रोत अभिलेख 1.102 · पुस्तक पृ. 116, 116
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कत बिधि सृजीं नारि जग माहीं। पराधीन सपनेहुँ सुखु नाहीं।।
English explanation
Why did the Creator make woman in this world? One subject to another has no happiness even in dreams.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कत | क्यों | why |
| बिधि | विधाता ने | the Creator |
| सृजीं | रचा | created |
| नारि | नारी को | woman |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
| पराधीन | दूसरे के अधीन व्यक्ति को | one subject to another |
| सपनेहुँ | सपने में भी | even in dreams |
| सुखु | सुख | happiness |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
2 भै अति प्रेम बिकल महतारी। धीरजु कीन्ह कुसमय बिचारी।।
English explanation
The mother became deeply overwhelmed with love; then, considering this an ill-timed moment for such distress, she steadied herself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भै | हो गईं | became |
| अति | अत्यंत | deeply |
| प्रेम | प्रेम से | with love |
| बिकल | व्याकुल | overwhelmed |
| महतारी | माता | the mother |
| धीरजु | धैर्य | composure |
| कीन्ह | धारण किया | maintained |
| कुसमय | अनुपयुक्त समय | an unsuitable moment |
| बिचारी | विचारकर | having considered |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.102
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 116
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 116, 116
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।