बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करेहु सदा संकर पद पूजा। नारिधरमु पति देउ न दूजा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे पार्वती! तू सदा शिवजीके चरणकी पूजा करना, नारियोंका यही धर्म है। उनके लिये पति ही देवता है और कोई देवता नहीं है। इस प्रकारकी बातें कहते-कहते उनकी आँखोंमें आँसू भर आये और उन्होंने कन्याको छातीसे चिपटा लिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 116 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
करेहु सदा संकर पद पूजा। नारिधरमु पति देउ न दूजा।।
बचन कहत भरे लोचन बारी। बहुरि लाइ उर लीन्हि कुमारी।।
स्रोत अभिलेख 1.102 · पुस्तक पृ. 116, 116
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 करेहु सदा संकर पद पूजा। नारिधरमु पति देउ न दूजा।।
English explanation
Always worship Shankara’s feet. A woman’s duty, she says, is to regard her husband as her deity, and no other.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करेहु | तुम करना | you should perform |
| सदा | सदा | always |
| संकर | शिव के | of Shiva |
| पद | चरणों की | of the feet |
| पूजा | पूजा | worship |
| नारिधरमु | नारी का धर्म | a woman’s duty |
| पति | पति | the husband |
| देउ | देवता | deity |
| न | नहीं | not |
| दूजा | दूसरा कोई | any other |
2 बचन कहत भरे लोचन बारी। बहुरि लाइ उर लीन्हि कुमारी।।
English explanation
As she spoke these words, the mother’s eyes filled with tears. She once again clasped her daughter to her breast.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बचन | ये वचन | these words |
| कहत | कहते हुए | while speaking |
| भरे | भर गए | filled |
| लोचन | आँखें | eyes |
| बारी | आँसुओं से | with tears |
| बहुरि | फिर | again |
| लाइ | लगाकर | drawing close |
| उर | हृदय से | to her breast |
| लीन्हि | ले लिया | clasped |
| कुमारी | अपनी बेटी उमा को | her daughter Uma |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.102
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 116
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 116, 116
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।