बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहु बिधि संभु सास समुझाई। गवनी भवन चरन सिरु नाई।।
मूल पाठ
बहु बिधि संभु सास समुझाई। गवनी भवन चरन सिरु नाई।।
जननीं उमा बोलि तब लीन्ही। लै उछंग सुंदर सिख दीन्ही।।
स्रोत अभिलेख 1.102 · पुस्तक पृ. 116, 116
भावार्थ
मूल पाठ के बादशिवजीने बहुत तरहसे अपनी सासको समझाया। तब वे शिवजीके चरणोंमें सिर नवाकर घर गयीं। फिर माताने पार्वतीको बुला लिया और गोदमें बैठाकर यह सुन्दर सीख दी—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 116 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बहु बिधि संभु सास समुझाई। गवनी भवन चरन सिरु नाई।।
English explanation
Shiva reassured his mother-in-law in many ways. Bowing her head at his feet, she returned to her residence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहु | अनेक | many |
| बिधि | प्रकारों से | in ways |
| संभु | शिव ने | Shiva |
| सास | अपनी सास मैना को | his mother-in-law, Maina |
| समुझाई | समझाया और ढाढ़स दिया | reassured |
| गवनी | वे चली गईं | she departed |
| भवन | अपने भवन को | to her residence |
| चरन | शिव के चरणों में | at Shiva’s feet |
| सिरु | सिर | her head |
| नाई | झुकाकर | having bowed |
2 जननीं उमा बोलि तब लीन्ही। लै उछंग सुंदर सिख दीन्ही।।
English explanation
Then her mother called Uma to her and, taking her into her lap, gave her good counsel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जननीं | माता ने | her mother |
| उमा | पार्वती को | Uma, Parvati |
| बोलि | बुलाकर | having called |
| तब | तब | then |
| लीन्ही | अपने पास ले लिया | drew her near |
| लै | लेकर | taking her |
| उछंग | गोद में | into her lap |
| सुंदर | अच्छी | good |
| सिख | सीख | counsel |
| दीन्ही | दी | gave |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.102
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 116
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 116, 116
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।