बालकाण्ड · छंद · छंद
जननिहि बहुरि मिलि चली उचित असीस सब काहूँ दईं।
मूल पाठ
जननिहि बहुरि मिलि चली उचित असीस सब काहूँ दईं।
फिरि फिरि बिलोकति मातु तन तब सखीं लै सिव पहिं गईं॥
जाचक सकल संतोषि संकरु उमा सहित भवन चले।
सब अमर हरषे सुमन बरषि निसान नभ बाजे भले॥
स्रोत अभिलेख 1.102 · पुस्तक पृ. 116, 116
भावार्थ
मूल पाठ के बादपार्वतीजी मातासे फिर मिलकर चलीं, सब किसीने उन्हें योग्य आशीर्वाद दिये। पार्वतीजी फिर-फिरकर माताकी ओर देखती जाती थीं। तब सखियाँ उन्हें शिवजीके पास ले गयीं। महादेवजी सब याचकोंको सन्तुष्ट कर पार्वतीके साथ घर (कैलास) को चले। सब देवता प्रसन्न होकर फूलोंकी वर्षा करने लगे और आकाशमें सुन्दर नगाड़े बजने लगे।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 117 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1जननिहि बहुरि मिलि चली उचित असीस सब काहूँ दईं।
English explanation
AI-generated draft meaning: After meeting her mother once more, Parvati departed; everyone gave her fitting blessings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जननिहि | माता से | with her mother |
| बहुरि | फिर | again |
| मिलि | मिलकर | having met |
| चली | पार्वती चलीं | Parvati departed |
| उचित | उचित | fitting |
| असीस | आशीर्वाद | blessings |
| सब | सभी | everyone |
| काहूँ | प्रत्येक ने | each person gave |
| दईं | दिए | gave |
2फिरि फिरि बिलोकति मातु तन तब सखीं लै सिव पहिं गईं॥
English explanation
Parvati kept turning back to look at her mother; then her companions took her to Shiva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फिरि | मुड़कर | turning back |
| फिरि | फिर | again |
| बिलोकति | देखती हुई | looking at |
| मातु | माता का | her mother's |
| तन | शरीर | person; body |
| तब | तब | then |
| सखीं | सखियाँ | her female companions |
| लै | उन्हें लेकर | taking her |
| सिव | भगवान शिव | Shiva |
| पहिं | के पास | to; near |
| गईं | गईं | went |
3जाचक सकल संतोषि संकरु उमा सहित भवन चले।
English explanation
After satisfying all the petitioners, Shiva departed for his abode with Uma.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाचक | याचकों को | the petitioners |
| सकल | सभी | all |
| संतोषि | संतुष्ट करके | having satisfied |
| संकरु | शंकर, अर्थात शिव | Shiva |
| उमा | उमा, अर्थात पार्वती | Uma, Parvati |
| सहित | के साथ | with |
| भवन | अपने निवास की ओर | toward his abode |
| चले | चले | departed |
4सब अमर हरषे सुमन बरषि निसान नभ बाजे भले॥
English explanation
All the gods rejoiced and showered flowers; splendid kettledrums resounded in the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| अमर | देवता | gods |
| हरषे | हर्षित हुए | rejoiced |
| सुमन | फूल | flowers |
| बरषि | बरसाकर | showering |
| निसान | नगाड़े | kettledrums |
| नभ | आकाश में | in the sky |
| बाजे | बजे | resounded |
| भले | सुंदर; सुहावने | splendid; pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.102
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 117
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 116, 116
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।