बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि परिहरे सुखानेउ परना। उमहि नाम तब भयउ अपरना।।
मूल पाठ
पुनि परिहरे सुखानेउ परना। उमहि नाम तब भयउ अपरना।।
देखि उमहि तप खीन सरीरा। ब्रह्मगिरा भै गगन गभीरा।।
स्रोत अभिलेख 1.74 · पुस्तक पृ. 90, 91
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर सूखे पर्ण (पत्ते) भी छोड़ दिये, तभी पार्वतीका नाम 'अपर्णा हुआ। तपसे उमाका शरीर क्षीण देखकर आकाशसे गम्भीर ब्रह्मवाणी हुई—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 91 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पुनि परिहरे सुखानेउ परना। उमहि नाम तब भयउ अपरना।।
English explanation
Then she gave up even dried leaves; Uma then came to be called Aparna.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| परिहरे | त्याग दिए | gave up |
| सुखानेउ | सूखे भी | even dried |
| परना | पत्ते | leaves |
| उमहि | उमा का | of Uma |
| नाम | नाम | name |
| तब | तब | then |
| भयउ | हुआ | became |
| अपरना | अपर्णा, पत्ते भी न खाने वाली | Aparna, she who takes no leaves |
2 देखि उमहि तप खीन सरीरा। ब्रह्मगिरा भै गगन गभीरा।।
English explanation
Seeing Uma’s body emaciated by austerities, Brahma’s deep voice sounded in the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| उमहि | उमा को | Uma |
| तप | तपस्या से | by austerities |
| खीन | क्षीण | emaciated |
| सरीरा | शरीर वाली | in body |
| ब्रह्मगिरा | ब्रह्मा की वाणी | Brahma’s voice |
| भै | हुई | sounded |
| गगन | आकाश में | in the sky |
| गभीरा | गंभीर | deep and solemn |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.74
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 91
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 90, 91
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