बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कछु दिन भोजनु बारि बतासा। किए कठिन कछु दिन उपबासा।।
मूल पाठ
कछु दिन भोजनु बारि बतासा। किए कठिन कछु दिन उपबासा।।
बेल पाती महि परइ सुखाई। तीनि सहस संबत सोई खाई।।
स्रोत अभिलेख 1.74 · पुस्तक पृ. 90, 91
भावार्थ
मूल पाठ के बादकुछ दिन जल और वायुका भोजन किया और फिर कुछ दिन कठोर उपवास किये। जो बेलपत्र सूखकर पृथ्वीपर गिरते थे, तीन हजार वर्षतक उन्हींको खाया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 91 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कछु दिन भोजनु बारि बतासा। किए कठिन कछु दिन उपबासा।।
English explanation
For some days she subsisted on water and air; for some days she observed severe fasts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कछु | कुछ | some |
| दिन | दिनों तक | for days |
| भोजनु | आहार | sustenance |
| बारि | जल | water |
| बतासा | वायु | air |
| किए | किए | observed |
| कठिन | कठोर | severe |
| कछु | कुछ | some |
| दिन | दिनों तक | for days |
| उपबासा | उपवास | fasts |
2 बेल पाती महि परइ सुखाई। तीनि सहस संबत सोई खाई।।
English explanation
For three thousand years she ate only the dried leaves of the bael tree that fell to the ground.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बेल | बेल वृक्ष की | of the bael tree |
| पाती | पत्तियाँ | leaves |
| महि | भूमि पर | on the ground |
| परइ | गिरती थीं | fell |
| सुखाई | सूखकर | having dried |
| तीनि | तीन | three |
| सहस | हजार | thousand |
| संबत | वर्ष | years |
| सोई | उन्हीं को | those alone |
| खाई | खाया | ate |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.74
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 91
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 90, 91
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।