बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि तिन्ह के गृह जेवँइ जोऊ। तव बस होइ भूप सुनु सोऊ।।
मूल पाठ
पुनि तिन्ह के गृह जेवँइ जोऊ। तव बस होइ भूप सुनु सोऊ।।
जाइ उपाय रचहु नृप एहू। संबत भरि संकलप करेहू।।
स्रोत अभिलेख 1.168 · पुस्तक पृ. 171, 172
भावार्थ
मूल पाठ के बादयही नहीं, उन (भोजन करनेवालों) के घर भी जो कोई भोजन करेगा, हे राजन्! सुनो, वह भी तुम्हारे अधीन हो जायगा। हे राजन्! जाकर यही उपाय करो और वर्षभर [भोजन कराने] का सङ्कल्प कर लेना॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 171 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पुनि तिन्ह के गृह जेवँइ जोऊ। तव बस होइ भूप सुनु सोऊ।।
English explanation
Further, whoever eats in their homes will also come under your control—listen, O king.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर; आगे | further; then |
| तिन्ह | उन लोगों | those people |
| के | के | of |
| गृह | घर में | in the home |
| जेवँइ | भोजन करेगा | will eat |
| जोऊ | जो भी | whoever |
| तव | तुम्हारे | your |
| बस | वश में | under control |
| होइ | हो जाएगा | will become |
| भूप | हे राजा | O king |
| सुनु | सुनो | listen |
| सोऊ | वह भी | that person too |
2 जाइ उपाय रचहु नृप एहू। संबत भरि संकलप करेहू।।
English explanation
O king, go and arrange this plan, and undertake a vow for a full year.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाइ | जाकर | having gone |
| उपाय | उपाय; व्यवस्था | plan or arrangement |
| रचहु | रचो; व्यवस्थित करो | devise; arrange |
| नृप | हे राजा | O king |
| एहू | यह उपाय | this plan |
| संबत | एक वर्ष | one year |
| भरि | भर; पूरे समय तक | throughout |
| संकलप | संकल्प; व्रत का निश्चय | vow or solemn resolve |
| करेहू | करो; लेना | undertake |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.168
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 171
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 171, 172
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।