बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि चरननि मेले सुत चारी। राम देखि मुनि देह बिसारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दफिर राजाने चारों पुत्रोंको मुनिके चरणोंपर डाल दिया (उनसे प्रणाम कराया)। श्रीरामचन्द्रजीको देखकर मुनि अपनी देहकी सुधि भूल गये। वे श्रीरामजीके मुखकी शोभा देखते ही ऐसे मग्र हो गये, मानो चकोर पूर्ण चन्द्रमाको देखकर लुभा गया हो॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 205 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पुनि चरननि मेले सुत चारी। राम देखि मुनि देह बिसारी।।
भए मगन देखत मुख सोभा। जनु चकोर पूरन ससि लोभा।।
स्रोत अभिलेख 1.207 · पुस्तक पृ. 205, 206
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पुनि चरननि मेले सुत चारी। राम देखि मुनि देह बिसारी।।
English explanation
Then the king had his four sons bow at the sage’s feet. Seeing Rama, the sage forgot his bodily awareness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| चरननि | चरणों में | at the feet |
| मेले | प्रणाम के लिए लगाया | brought to bow |
| सुत | पुत्रों को | sons |
| चारी | चारों | all four |
| राम | राम को | Rama |
| देखि | देखकर | on seeing |
| मुनि | मुनि विश्वामित्र ने | sage Vishvamitra |
| देह | शरीर की सुध | awareness of his body |
| बिसारी | भुला दी | forgot |
2 भए मगन देखत मुख सोभा। जनु चकोर पूरन ससि लोभा।।
English explanation
Gazing at the beauty of Rama’s face, the sage became absorbed, like a chakora bird captivated by the full moon.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भए | हो गए | became |
| मगन | मग्न | absorbed |
| देखत | देखते हुए | while gazing at |
| मुख | मुख की | of the face |
| सोभा | शोभा | beauty |
| जनु | मानो | as though |
| चकोर | चकोर पक्षी | a chakora bird |
| पूरन | पूर्ण | full |
| ससि | चंद्रमा पर | by the moon |
| लोभा | मोहित हुआ | was captivated |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.207
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 205
- सहायक विषय
- विश्वामित्रका राजा दशरथसे राम-लक्ष्मणको माँगना
- मुद्रित पृष्ठ
- 205, 206
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।