बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चरन पखारि कीन्हि अति पूजा। मो सम आजु धन्य नहिं दूजा।।
मूल पाठ
चरन पखारि कीन्हि अति पूजा। मो सम आजु धन्य नहिं दूजा।।
बिबिध भाँति भोजन करवावा। मुनिवर हृदयँ हरष अति पावा।।
स्रोत अभिलेख 1.207 · पुस्तक पृ. 205, 206
भावार्थ
मूल पाठ के बादचरणोंको धोकर बहुत पूजा की और कहा—मेरे समान धन्य आज दूसरा कोई नहीं है। फिर अनेक प्रकारके भोजन करवाये, जिससे श्रेष्ठ मुनिने अपने हृदयमें बहुत ही हर्ष प्राप्त किया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 205 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चरन पखारि कीन्हि अति पूजा। मो सम आजु धन्य नहिं दूजा।।
English explanation
The king washed the sage’s feet and worshipped him with great reverence, saying, ‘Today no one else is as blessed as I am.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चरन | चरण | feet |
| पखारि | धोकर | having washed |
| कीन्हि | की | performed |
| अति | बहुत | with great reverence |
| पूजा | पूजा | worship |
| मो | मेरे | me |
| सम | समान | equal to |
| आजु | आज | today |
| धन्य | धन्य | blessed |
| नहिं | नहीं है | there is not |
| दूजा | दूसरा कोई | anyone else |
2 बिबिध भाँति भोजन करवावा। मुनिवर हृदयँ हरष अति पावा।।
English explanation
The king served the sage food of various kinds, and the eminent sage felt great joy in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिबिध | विविध | various |
| भाँति | प्रकार का | kinds of |
| भोजन | भोजन | food |
| करवावा | खिलवाया | had served to him |
| मुनिवर | श्रेष्ठ मुनि ने | the eminent sage |
| हृदयँ | हृदय में | in his heart |
| हरष | आनंद | joy |
| अति | बहुत | great |
| पावा | पाया | experienced |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.207
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 205
- सहायक विषय
- विश्वामित्रका राजा दशरथसे राम-लक्ष्मणको माँगना
- मुद्रित पृष्ठ
- 205, 206
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।