बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब मन हरषि बचन कह राऊ। मुनि अस कृपा न कीन्हिहु काऊ।।
मूल पाठ
तब मन हरषि बचन कह राऊ। मुनि अस कृपा न कीन्हिहु काऊ।।
केहि कारन आगमन तुम्हारा। कहहु सो करत न लावउँ बारा।।
स्रोत अभिलेख 1.207 · पुस्तक पृ. 205, 206
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब राजाने मनमें हॢषत होकर ये वचन कहे—हे मुनि! इस प्रकार कृपा तो आपने कभी नहीं की। आज किस कारणसे आपका शुभागमन हुआ? कहिये, मैं उसे पूरा करनेमें देर नहीं लगाऊँगा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 205 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब मन हरषि बचन कह राऊ। मुनि अस कृपा न कीन्हिहु काऊ।।
English explanation
Then the king, glad at heart, said, ‘O sage, you have never before shown such kindness.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| मन | मन में | at heart |
| हरषि | प्रसन्न होकर | rejoicing |
| बचन | वचन | words |
| कह | कहे | spoke |
| राऊ | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| मुनि | हे मुनि | O sage |
| अस | ऐसी | such |
| कृपा | कृपा | kindness |
| न | नहीं | not |
| कीन्हिहु | आपने की | you have shown |
| काऊ | कभी | ever |
2 केहि कारन आगमन तुम्हारा। कहहु सो करत न लावउँ बारा।।
English explanation
‘For what reason have you come? Tell me; I shall not delay in carrying out that task.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| केहि | किस | what |
| कारन | कारण से | for reason |
| आगमन | आना हुआ | arrival |
| तुम्हारा | आपका | your |
| कहहु | कहिए | please tell me |
| सो | वह कार्य | that task |
| करत | करने में | in doing |
| न | नहीं | not |
| लावउँ | मैं लगाऊँगा | I shall take |
| बारा | देर | time in delay |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.207
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 205
- सहायक विषय
- विश्वामित्रका राजा दशरथसे राम-लक्ष्मणको माँगना
- मुद्रित पृष्ठ
- 205, 206
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