बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पानिग्रहन जब कीन्ह महेसा। हिंयँ हरषे तब सकल सुरेसा।।
मूल पाठ
पानिग्रहन जब कीन्ह महेसा। हिंयँ हरषे तब सकल सुरेसा।।
बेद मंत्र मुनिबर उच्चरहीं। जय जय जय संकर सुर करहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.101 · पुस्तक पृ. 115, 115
भावार्थ
मूल पाठ के बादजब महेश्वर (शिवजी) ने पार्वतीका पाणिग्रहण किया, तब [इन्द्रादि] सब देवता हृदयमें बड़े ही हॢषत हुए। श्रेष्ठ मुनिगण वेदमन्त्रोंका उच्चारण करने लगे और देवगण शिवजीका जय-जयकार करने लगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 115 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पानिग्रहन जब कीन्ह महेसा। हिंयँ हरषे तब सकल सुरेसा।।
English explanation
When Shiva performed the hand-taking marriage rite, all the gods rejoiced in their hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पानिग्रहन | विवाह में वधू का हाथ ग्रहण करने का संस्कार | the marriage rite of taking the bride's hand |
| जब | जब | when |
| कीन्ह | किया | performed |
| महेसा | महेश; शिव ने | Shiva, the great Lord |
| हिंयँ | हृदय में | in their hearts |
| हरषे | हर्षित हुए | rejoiced |
| तब | तब | then |
| सकल | सभी | all |
| सुरेसा | देवता | the gods |
2 बेद मंत्र मुनिबर उच्चरहीं। जय जय जय संकर सुर करहीं।।
English explanation
The eminent sages recited Vedic mantras, while the gods acclaimed, ‘Hail, hail, hail to Shiva!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बेद | वेदों के | Vedic |
| मंत्र | मंत्र | mantras; sacred formulas |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि | eminent sages |
| उच्चरहीं | उच्चारण कर रहे थे | were reciting |
| जय | जय हो | hail |
| जय | जय हो | hail |
| जय | जय हो | hail |
| संकर | शंकर की; शिव की | to Shiva |
| सुर | देवता | the gods |
| करहीं | जयघोष कर रहे थे | were acclaiming |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.101
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 115
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 115, 115
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