बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पाइ असीस महीसु अनंदा। लिए बोलि पुनि जाचक बृंदा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[ब्राह्मणोंसे] आशीर्वाद पाकर राजा आनन्दित हुए। फिर याचकोंके समूहोंको बुलवा लिया और सबको उनकी रुचि पूछकर सोना, वस्त्र, मणि, घोड़ा, हाथी और रथ (जिसने जो चाहा सो) सूर्यकुलको आनन्दित करनेवाले दशरथजीने दिये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 316 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पाइ असीस महीसु अनंदा। लिए बोलि पुनि जाचक बृंदा।।
कनक बसन मनि हय गय स्यंदन। दिए बूझि रुचि रबिकुलनंदन।।
स्रोत अभिलेख 1.331 · पुस्तक पृ. 316, 317
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पाइ असीस महीसु अनंदा। लिए बोलि पुनि जाचक बृंदा।।
English explanation
Receiving blessings, the king rejoiced; then he summoned groups of supplicants.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पाइ | पाकर | having received |
| असीस | आशीर्वाद | blessings |
| महीसु | राजा | the king |
| अनंदा | आनंदित हुए | rejoiced |
| लिए | ले लिया, बुलवा लिया | had them summoned |
| बोलि | बुलाकर | calling them |
| पुनि | फिर | then |
| जाचक | दान माँगने वाले | supplicants seeking gifts |
| बृंदा | समूह | groups |
2 कनक बसन मनि हय गय स्यंदन। दिए बूझि रुचि रबिकुलनंदन।।
English explanation
Dasharatha, the joy of the solar dynasty, learned their preferences and gave gold, clothing, jewels, horses, elephants, and chariots.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कनक | सोना | gold |
| बसन | वस्त्र | clothing |
| मनि | रत्न | jewels |
| हय | घोड़े | horses |
| गय | हाथी | elephants |
| स्यंदन | रथ | chariots |
| दिए | दिए | gave |
| बूझि | जानकर | having ascertained |
| रुचि | उनकी इच्छा | their preferences |
| रबिकुलनंदन | सूर्यवंश के आनंददाता दशरथ ने | Dasharatha, joy of the solar dynasty |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.331
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 316
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 316, 317
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