बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चले पढ़त गावत गुन गाथा। जय जय जय दिनकर कुल नाथा।।
मूल पाठ
चले पढ़त गावत गुन गाथा। जय जय जय दिनकर कुल नाथा।।
एहि बिधि राम बिआह उछाहू। सकइ न बरनि सहस मुख जाहू।।
स्रोत अभिलेख 1.331 · पुस्तक पृ. 316, 317
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे सब गुणानुवाद गाते और 'सूर्यकुलके स्वामीकी जय हो, जय हो, जय हो कहते हुए चले। इस प्रकार श्रीरामचन्द्रजीके विवाहका उत्सव हुआ। जिन्हें सहस्र मुख हैं वे शेषजी भी उसका वर्णन नहीं कर सकते॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 316 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चले पढ़त गावत गुन गाथा। जय जय जय दिनकर कुल नाथा।।
English explanation
They departed reciting and singing accounts of his virtues: ‘Victory, victory, victory to the lord of the solar dynasty!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | वे चले | they departed |
| पढ़त | पाठ करते हुए | reciting |
| गावत | गाते हुए | singing |
| गुन | गुणों की | of virtues |
| गाथा | गाथाएँ | songs of praise |
| जय | जय हो | victory! |
| जय | जय हो | victory! |
| जय | जय हो | victory! |
| दिनकर | सूर्य के | of the sun |
| कुल | वंश के | of the dynasty |
| नाथा | हे स्वामी दशरथ | O lord Dasharatha |
2 एहि बिधि राम बिआह उछाहू। सकइ न बरनि सहस मुख जाहू।।
English explanation
Such was the joyous celebration of Rama’s wedding that even the one with a thousand mouths could not describe it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | manner |
| राम | राम का | of Rama |
| बिआह | विवाह | wedding |
| उछाहू | आनंदमय उत्सव | joyous celebration |
| सकइ | सकता है | can |
| न | नहीं | not |
| बरनि | वर्णन कर | describe |
| सहस | हजार | a thousand |
| मुख | मुख | mouths |
| जाहू | जिसके हैं | who has |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.331
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 316
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 316, 317
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।