बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पहुँचावहिं फिरि मिलहिं बहोरी। बढ़ी परस्पर प्रीति न थोरी।।
मूल पाठ
पहुँचावहिं फिरि मिलहिं बहोरी। बढ़ी परस्पर प्रीति न थोरी।।
पुनि पुनि मिलत सखिन्ह बिलगाई। बाल बच्छ जिमि धेनु लवाई।।
स्रोत अभिलेख 1.337 · पुस्तक पृ. 321, 321
भावार्थ
मूल पाठ के बादपुत्रियोंको पहुँचाती हैं, फिर लौटकर मिलती हैं। परस्परमेंं कुछ थोड़ी प्रीति नहीं बढ़ी (अर्थात् बहुत प्रीति बढ़ी)। बार-बार मिलती हुई माताओंको सखियोंने अलग कर दिया। जैसे हालकी ब्यायी हुई गायको कोई उसके बालक बछड़े [या बछिया] से अलग कर दे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 321 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पहुँचावहिं फिरि मिलहिं बहोरी। बढ़ी परस्पर प्रीति न थोरी।।
English explanation
They escort Sita on her way, then turn back and embrace her again; their mutual love has grown greatly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पहुँचावहिं | विदा करने आगे पहुँचाती हैं | escort her on her way |
| फिरि | फिर लौटकर | turning back |
| मिलहिं | मिलती हैं | meet her |
| बहोरी | दोबारा | again |
| बढ़ी | बढ़ गई | grew |
| परस्पर | एक-दूसरे के प्रति | mutual |
| प्रीति | प्रेम | love |
| न | नहीं | not |
| थोरी | थोड़ी | a little |
2 पुनि पुनि मिलत सखिन्ह बिलगाई। बाल बच्छ जिमि धेनु लवाई।।
English explanation
As they kept embracing, the companions separated Sita from them, like separating a newly calved cow from her young calf.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| मिलत | गले मिलते हुए | while embracing |
| सखिन्ह | सखियों ने | the female companions |
| बिलगाई | अलग किया | separated her |
| बाल | छोटा, नन्हा | young |
| बच्छ | बछड़ा | calf |
| जिमि | जैसे | as |
| धेनु | गाय | cow |
| लवाई | नई ब्याई हुई | newly calved |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.337
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 321
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 321, 321
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।