बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मंजु मधुर मूरति उर आनी। भई सनेह सिथिल सब रानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामजीकी सुन्दर मधुर मूॢतको हृदयमें लाकर सब रानियाँ स्नेहसे शिथिल हो गयीं। फिर धीरज धारण करके कुमारियोंको बुलाकर माताएँ बारंबार उन्हें [गले लगाकर] भेंटने लगीं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 321 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मंजु मधुर मूरति उर आनी। भई सनेह सिथिल सब रानी।।
पुनि धीरजु धरि कुअँरि हँकारी। बार बार भेटहिं महतारीं।।
स्रोत अभिलेख 1.337 · पुस्तक पृ. 321, 321
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मंजु मधुर मूरति उर आनी। भई सनेह सिथिल सब रानी।।
English explanation
Holding Rama’s beautiful, charming form in their hearts, all the queens grew weak with affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंजु | सुंदर | beautiful |
| मधुर | मनोहर | charming |
| मूरति | राम की छवि | Rama’s form |
| उर | हृदय में | in the heart |
| आनी | लाकर | having brought |
| भई | हो गईं | became |
| सनेह | स्नेह से | with affection |
| सिथिल | शिथिल, निढाल | weak, overcome |
| सब | सभी | all |
| रानी | रानियाँ | the queens |
2 पुनि धीरजु धरि कुअँरि हँकारी। बार बार भेटहिं महतारीं।।
English explanation
Then, regaining composure, they called Princess Sita; the mothers embrace her again and again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| धीरजु | धैर्य | composure |
| धरि | धारण करके | having regained |
| कुअँरि | राजकुमारी सीता को | Princess Sita |
| हँकारी | बुलाया | called |
| बार | बार | time |
| बार | बार | after time |
| भेटहिं | गले मिलती हैं | embrace her |
| महतारीं | माताएँ | the mothers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.337
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 321
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 321, 321
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।