बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम बिदा मागत कर जोरी। कीन्ह प्रनामु बहोरि बहोरी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतब श्रीरामचन्द्रजीने हाथ जोड़कर विदा माँगते हुए बार-बार प्रणाम किया। आशीर्वाद पाकर और फिर सिर नवाकर भाइयोंसहित श्रीरघुनाथजी चले॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 321 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम बिदा मागत कर जोरी। कीन्ह प्रनामु बहोरि बहोरी।।
पाइ असीस बहुरि सिरु नाई। भाइन्ह सहित चले रघुराई।।
स्रोत अभिलेख 1.337 · पुस्तक पृ. 321, 321
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम बिदा मागत कर जोरी। कीन्ह प्रनामु बहोरि बहोरी।।
English explanation
With folded hands, Rama asks leave to depart and bows again and again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम | Rama |
| बिदा | विदा की अनुमति | leave to depart |
| मागत | माँगते हैं | asks |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | having joined |
| कीन्ह | किया | made |
| प्रनामु | प्रणाम | a respectful bow |
| बहोरि | फिर | again |
| बहोरी | फिर | again |
2 पाइ असीस बहुरि सिरु नाई। भाइन्ह सहित चले रघुराई।।
English explanation
Receiving blessings and bowing his head once more, Rama, lord of the Raghu lineage, departed with his brothers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पाइ | पाकर | having received |
| असीस | आशीर्वाद | blessings |
| बहुरि | फिर | again |
| सिरु | सिर | head |
| नाई | झुकाकर | having bowed |
| भाइन्ह | भाइयों के | his brothers |
| सहित | साथ | with |
| चले | चले | departed |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.337
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 321
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 321, 321
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।