बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परसि जासु पद पंकज धूरी। तरी अहल्या कृत अघ भूरी।।
मूल पाठ
परसि जासु पद पंकज धूरी। तरी अहल्या कृत अघ भूरी।।
सो कि रहिहि बिनु सिवधनु तोरें। यह प्रतीति परिहरिअ न भोरें।।
स्रोत अभिलेख 1.223 · पुस्तक पृ. 219, 220
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिनके चरणकमलोंकी धूलिका स्पर्श पाकर अहल्या तर गयी, जिसने बड़ा भारी पाप किया था, वे क्या शिवजीका धनुष बिना तोड़े रहेंगे। इस विश्वासको भूलकर भी नहीं छोडऩा चाहिये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 220 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 परसि जासु पद पंकज धूरी। तरी अहल्या कृत अघ भूरी।।
English explanation
‘By touching the dust of whose lotus feet Ahalya, who had committed grave sin, was delivered,’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परसि | स्पर्श करके | having touched |
| जासु | जिनके; राम के | whose; Rama’s |
| पद | चरण | feet |
| पंकज | कमल | lotuses |
| धूरी | धूल | dust |
| तरी | तर गईं; उद्धार हुआ | was delivered |
| अहल्या | अहल्या; गौतम ऋषि की पत्नी | Ahalya, sage Gautama’s wife |
| कृत | किए हुए | committed |
| अघ | पाप | sin |
| भूरी | बहुत; भारी | much; grave |
2 सो कि रहिहि बिनु सिवधनु तोरें। यह प्रतीति परिहरिअ न भोरें।।
English explanation
‘Would he leave Shiva’s bow unbroken? Do not abandon this conviction even inadvertently.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वे; राम | he; Rama |
| कि | क्या | would; question marker |
| रहिहि | रह जाएँगे | will remain |
| बिनु | बिना | without |
| सिवधनु | शिव का धनुष | Shiva’s bow |
| तोरें | तोड़े | breaking |
| यह | यह | this |
| प्रतीति | विश्वास | conviction |
| परिहरिअ | त्यागना; छोड़ना | abandon |
| न | नहीं; मत | not |
| भोरें | भूल से भी | even inadvertently |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.223
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 220
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 219, 220
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।