बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जेहिं बिरंचि रचि सीय सँवारी। तेहिं स्यामल बरु रचेउ बिचारी।।
मूल पाठ
जेहिं बिरंचि रचि सीय सँवारी। तेहिं स्यामल बरु रचेउ बिचारी।।
तासु बचन सुनि सब हरषानीं। ऐसेइ होउ कहहिं मुदु बानी।।
स्रोत अभिलेख 1.223 · पुस्तक पृ. 219, 220
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिस ब्रह्माने सीताको सँवारकर (बड़ी चतुराईसे) रचा है, उसीने विचारकर साँवला वर भी रच रखा है। उसके ये वचन सुनकर सब हॢषत हुईं और कोमल वाणीसे कहने लगीं—ऐसा ही हो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 220 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जेहिं बिरंचि रचि सीय सँवारी। तेहिं स्यामल बरु रचेउ बिचारी।।
English explanation
‘The very Brahma who created and adorned Sita thoughtfully fashioned this dark-complexioned bridegroom.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहिं | जिसने; जिस | who; the one who |
| बिरंचि | ब्रह्मा; सृष्टिकर्ता | Brahma, the creator |
| रचि | रचकर | having created |
| सीय | सीता को | Sita |
| सँवारी | सँवारा; सुंदर बनाया | adorned; made beautiful |
| तेहिं | उसी ने | that same one |
| स्यामल | साँवला | dark-complexioned |
| बरु | वर; दूल्हा राम | bridegroom, Rama |
| रचेउ | रचा; बनाया | created; fashioned |
| बिचारी | विचार करके | thoughtfully |
2 तासु बचन सुनि सब हरषानीं। ऐसेइ होउ कहहिं मुदु बानी।।
English explanation
Hearing her words, all the women rejoiced and said gently, ‘May it be so.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तासु | उस सखी के | her |
| बचन | वचन; बात | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सब | सभी सखियाँ | all the women |
| हरषानीं | प्रसन्न हुईं | rejoiced |
| ऐसेइ | ऐसा ही | just so |
| होउ | हो | may it be |
| कहहिं | कहती हैं | say |
| मुदु | मधुर; कोमल | gentle; sweet |
| बानी | वाणी में | in speech |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.223
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 220
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 219, 220
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।