बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परम स्वतंत्र न सिर पर कोई। भावइ मनहि करहु तुम्ह सोई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतुम परम स्वतन्त्र हो, सिरपर तो कोई है नहीं, इससे जब जो मनको भाता है, [स्वच्छन्दतासे] वही करते हो। भलेको बुरा और बुरेको भला कर देते हो। हृदयमें हर्ष-विषाद कुछ भी नहीं लाते॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 146 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
परम स्वतंत्र न सिर पर कोई। भावइ मनहि करहु तुम्ह सोई।।
भलेहि मंद मंदेहि भल करहू। बिसमय हरष न हियँ कछु धरहू।।
स्रोत अभिलेख 1.137 · पुस्तक पृ. 146, 146
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 परम स्वतंत्र न सिर पर कोई। भावइ मनहि करहु तुम्ह सोई।।
English explanation
You are entirely independent, with no one above you. You do whatever pleases your mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परम | पूर्णतः | entirely |
| स्वतंत्र | किसी के अधीन नहीं | independent |
| न | नहीं | not |
| सिर | सिर; अधिकार के संदर्भ में | head, implying authority |
| पर | ऊपर | above |
| कोई | कोई अधिकारी | any superior |
| भावइ | अच्छा लगता है | pleases |
| मनहि | मन को | the mind |
| करहु | करते हो | you do |
| तुम्ह | तुम | you |
| सोई | वही | that very thing |
2 भलेहि मंद मंदेहि भल करहू। बिसमय हरष न हियँ कछु धरहू।।
English explanation
You make the good bad and the bad good, without holding any wonder or delight in your heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भलेहि | अच्छे को | the good |
| मंद | बुरा | bad |
| मंदेहि | बुरे को | the bad |
| भल | अच्छा | good |
| करहू | कर देते हो | you make |
| बिसमय | आश्चर्य | wonder |
| हरष | हर्ष | delight |
| न | नहीं | not |
| हियँ | हृदय में | in the heart |
| कछु | कुछ भी; तनिक भी | any at all |
| धरहू | रखते हो | you hold |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.137
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 146
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 146, 146
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।