बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
डहकि डहकि परिचेहु सब काहू। अति असंक मन सदा उछाहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसबको ठग-ठगकर परक गये हो और अत्यन्त निडर हो गये हो; इसीसे [ठगनेके काममें] मनमें सदा उत्साह रहता है। शुभ-अशुभ कर्म तुम्हें बाधा नहीं देते। अबतक तुमको किसीने ठीक नहीं किया था॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 146 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
डहकि डहकि परिचेहु सब काहू। अति असंक मन सदा उछाहू।।
करम सुभासुभ तुम्हहि न बाधा। अब लगि तुम्हहि न काहूँ साधा।।
स्रोत अभिलेख 1.137 · पुस्तक पृ. 146, 146
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 डहकि डहकि परिचेहु सब काहू। अति असंक मन सदा उछाहू।।
English explanation
By deceiving again and again, you have grown accustomed to deceiving everyone. Your mind is utterly unafraid and always full of zest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| डहकि | छल करके | by deceiving |
| डहकि | बार-बार छल करके | deceiving repeatedly |
| परिचेहु | अभ्यस्त हो गए हो | you have become accustomed |
| सब | सब | every |
| काहू | किसी को | person |
| अति | अत्यंत | utterly |
| असंक | निःशंक; निर्भय | unafraid; without apprehension |
| मन | मन | mind |
| सदा | सदैव | always |
| उछाहू | उत्साह | zest |
2 करम सुभासुभ तुम्हहि न बाधा। अब लगि तुम्हहि न काहूँ साधा।।
English explanation
Good and bad deeds do not constrain you. Until now, no one has brought you under control.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करम | कर्म | deeds |
| सुभासुभ | शुभ और अशुभ | good and bad |
| तुम्हहि | तुम्हें | you |
| न | नहीं | not |
| बाधा | बाधा देते; बाँधते | constrain; bind |
| अब | अब | now |
| लगि | तक | until |
| तुम्हहि | तुम्हें | you |
| न | नहीं | not |
| काहूँ | किसी ने | anyone |
| साधा | वश में किया | brought under control |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.137
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 146
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 146, 146
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।