बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भले भवन अब बायन दीन्हा। पावहुगे फल आपन कीन्हा।।
मूल पाठ
भले भवन अब बायन दीन्हा। पावहुगे फल आपन कीन्हा।।
बंचेहु मोहि जवनि धरि देहा। सोइ तनु धरहु श्राप मम एहा।।
स्रोत अभिलेख 1.137 · पुस्तक पृ. 146, 146
भावार्थ
मूल पाठ के बादअबकी तुमने अच्छे घर बैना दिया है (मेरे-जैसे जबर्दस्त आदमीसे छेडख़ानी की है)। अत: अपने कियेका फल अवश्य पाओगे। जिस शरीरको धारण करके तुमने मुझे ठगा है, तुम भी वही शरीर धारण करो, यह मेरा शाप है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 146 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भले भवन अब बायन दीन्हा। पावहुगे फल आपन कीन्हा।।
English explanation
Now you have delivered your ceremonial gift to quite the right household! You will reap the fruit of your own deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भले | अच्छे; यहाँ व्यंग्य में | good; here ironic |
| भवन | घर में | to a household |
| अब | अब | now |
| बायन | मांगलिक अवसर का बाँटा जाने वाला उपहार या मिठाई | a ceremonial gift or distributed sweets |
| दीन्हा | दिया है | have given |
| पावहुगे | तुम पाओगे | you will receive |
| फल | परिणाम | consequence |
| आपन | अपने | your own |
| कीन्हा | किए हुए कर्म का | of what you have done |
2 बंचेहु मोहि जवनि धरि देहा। सोइ तनु धरहु श्राप मम एहा।।
English explanation
Assume the very body in which you deceived me—this is my curse.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंचेहु | तुमने छला | you deceived |
| मोहि | मुझे | me |
| जवनि | जिस | which |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| देहा | देह | body |
| सोइ | वही | that very |
| तनु | शरीर | body |
| धरहु | धारण करो | assume |
| श्राप | शाप | curse |
| मम | मेरा | my |
| एहा | यही है | is this |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.137
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 146
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 146, 146
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।