बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पद राजीव बरनि नहि जाहीं। मुनि मन मधुप बसहिं जेन्ह माहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजिनमें मुनियोंके मनरूपी भौंरे बसते हैं, भगवान्के उन चरणकमलोंका तो वर्णन ही नहीं किया जा सकता। भगवान्के बायें भागमें सदा अनुकूल रहनेवाली, शोभाकी राशि, जगत्की मूलकारणरूपा आदिशक्ति श्रीजानकीजी सुशोभित हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 155 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पद राजीव बरनि नहि जाहीं। मुनि मन मधुप बसहिं जेन्ह माहीं।।
बाम भाग सोभति अनुकूला। आदिसक्ति छबिनिधि जगमूला।।
स्रोत अभिलेख 1.148 · पुस्तक पृ. 155, 155
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पद राजीव बरनि नहि जाहीं। मुनि मन मधुप बसहिं जेन्ह माहीं।।
English explanation
Those lotus-like feet cannot be adequately described; within them dwell the sages’ minds, like bees.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पद | चरण | feet |
| राजीव | कमल; चरणों की उपमा | lotuses; likening the feet to lotuses |
| बरनि | वर्णन किए | described |
| नहि | नहीं | not |
| जाहीं | जा सकते | can be |
| मुनि | मुनियों के | of the sages |
| मन | मन | minds |
| मधुप | भँवरे | bees |
| बसहिं | बसते हैं | dwell |
| जेन्ह | जिन चरणों के | in which feet |
| माहीं | भीतर | within |
2 बाम भाग सोभति अनुकूला। आदिसक्ति छबिनिधि जगमूला।।
English explanation
At his left shines Sita, his gracious companion—the primordial power, treasury of beauty, and source of the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बाम | बाएँ | left |
| भाग | भाग में | at the side |
| सोभति | शोभित हैं | shines |
| अनुकूला | अनुकूल स्वभाव वाली | gracious and harmonious with him |
| आदिसक्ति | आदि की सृजनशक्ति | primordial divine power |
| छबिनिधि | सुंदरता की निधि | treasury of beauty |
| जगमूला | जगत की मूल | source of the world |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.148
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 155
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 155, 155
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।