बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जासु अंस उपजहिं गुनखानी। अगनित लच्छि उमा ब्रह्मानी।।
मूल पाठ
जासु अंस उपजहिं गुनखानी। अगनित लच्छि उमा ब्रह्मानी।।
भृकुटि बिलास जासु जग होई। राम बाम दिसि सीता सोई।।
स्रोत अभिलेख 1.148 · पुस्तक पृ. 155, 155
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिनके अंशसे गुणोंकी खान अगणित लक्ष्मी, पार्वती और ब्रह्माणी (त्रिदेवोंकी शक्तियाँ) उत्पन्न होती हैं तथा जिनकी भौंहके इशारेसे ही जगत्की रचना हो जाती है, वही [भगवान्की स्वरूपा- शक्ति] श्रीसीताजी श्रीरामचन्द्रजीकी बायीं ओर स्थित हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 155 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जासु अंस उपजहिं गुनखानी। अगनित लच्छि उमा ब्रह्मानी।।
English explanation
From whose portion arise countless Lakshmis, Umas, and Brahmanis, all repositories of virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिनके; सीता के | whose; Sita’s |
| अंस | अंश से | from a portion |
| उपजहिं | उत्पन्न होती हैं | arise |
| गुनखानी | गुणों की खान | repositories of virtues |
| अगनित | असंख्य | countless |
| लच्छि | लक्ष्मियाँ; विष्णु की शक्तियाँ | Lakshmis, consorts of Vishnu |
| उमा | उमाएँ; शिव की शक्तियाँ | Umas, consorts of Shiva |
| ब्रह्मानी | ब्रह्माणियाँ; ब्रह्मा की शक्तियाँ | Brahmanis, consorts of Brahma |
2 भृकुटि बिलास जासु जग होई। राम बाम दिसि सीता सोई।।
English explanation
She by whose playful movement of the brows the world comes into being is that very Sita at Rama’s left.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भृकुटि | भौंहों की | of the brows |
| बिलास | लीला; सहज चेष्टा | playful movement |
| जासु | जिनकी | whose |
| जग | जगत | the world |
| होई | उत्पन्न होता है | comes into being |
| राम | भगवान राम की | of Lord Rama |
| बाम | बाईं | left |
| दिसि | दिशा में; ओर | on the side |
| सीता | सीता; राम की संगिनी | Sita, Rama’s consort |
| सोई | वही | that very one |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.148
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 155
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 155, 155
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।