बालकाण्ड · दोहा 147 · दोहा/सोरठा
तडित बिनिंदक पीत पट उदर रेख बर तीनि।।
तडित बिनिंदक पीत पट उदर रेख बर तीनि।।
नाभि मनोहर लेति जनु जमुन भवँर छबि छीनि।।147।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.147 · पुस्तक पृ. 154, 154
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तडित बिनिंदक पीत पट उदर रेख बर तीनि।।
पीला वस्त्र बिजली की चमक को भी मात देता है; पेट पर तीन सुंदर रेखाएँ हैं।
English explanation
The yellow garment outshines lightning; three lovely folds mark the abdomen.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तडित | बिजली की चमक को | lightning’s brilliance |
| बिनिंदक | मात देने वाला | outshining |
| पीत | पीला | yellow |
| पट | वस्त्र | garment |
| उदर | पेट पर | on the abdomen |
| रेख | रेखाएँ; वलियाँ | lines; folds |
| बर | सुंदर | lovely |
| तीनि | तीन | three |
2 नाभि मनोहर लेति जनु जमुन भवँर छबि छीनि।।147।।
मनोहर नाभि मानो यमुना के भँवर की सुंदरता छीन लेती है।
English explanation
The charming navel seems to steal the beauty of a whirlpool in the Yamuna.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाभि | नाभि | navel |
| मनोहर | मन को मोहने वाली | charming |
| लेति | लेती है | takes |
| जनु | मानो | as though |
| जमुन | यमुना नदी के | of the Yamuna River |
| भवँर | भँवर की | of a whirlpool |
| छबि | सुंदरता | beauty |
| छीनि | छीनकर | by stealing away |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 147
- स्रोत अभिलेख
- 1.147
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 154, 154
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