बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नृप उत्तानपाद सुत तासू। ध्रुव हरि भगत भयउ सुत जासू।।
मूल पाठ
नृप उत्तानपाद सुत तासू। ध्रुव हरि भगत भयउ सुत जासू।।
लघु सुत नाम प्रिय्रब्रत ताही। बेद पुरान प्रसंसहि जाही।।
स्रोत अभिलेख 1.142 · पुस्तक पृ. 150, 150
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजा उत्तानपाद उनके पुत्र थे, जिनके पुत्र [प्रसिद्ध] हरिभक्त ध्रुवजी हुए। उन (मनुजी) के छोटे लड़केका नाम प्रियव्रत था, जिसकी प्रशंसा वेद और पुराण करते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 150 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नृप उत्तानपाद सुत तासू। ध्रुव हरि भगत भयउ सुत जासू।।
English explanation
King Uttanapada was their son; his son Dhruva became a devotee of Hari.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नृप | राजा | king |
| उत्तानपाद | उत्तानपाद, मनु के पुत्र | Uttanapada, Manu’s son |
| सुत | पुत्र | son |
| तासू | उनके, अर्थात मनु के | his, referring to Manu |
| ध्रुव | ध्रुव, उत्तानपाद के पुत्र | Dhruva, Uttanapada’s son |
| हरि | भगवान विष्णु के | of Lord Vishnu |
| भगत | भक्त | devotee |
| भयउ | हुए | became |
| सुत | पुत्र | son |
| जासू | जिनके, अर्थात उत्तानपाद के | whose, referring to Uttanapada |
2 लघु सुत नाम प्रिय्रब्रत ताही। बेद पुरान प्रसंसहि जाही।।
English explanation
Their younger son was named Priyavrata, whom the Vedas and Puranas praise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लघु | छोटा | younger |
| सुत | पुत्र | son |
| नाम | नाम | name |
| प्रिय्रब्रत | प्रियव्रत, मनु के पुत्र | Priyavrata, Manu’s son |
| ताही | उसका, अर्थात छोटे पुत्र का | his, referring to the younger son |
| बेद | वेद | the Vedas |
| पुरान | पुराण | the Puranas |
| प्रसंसहि | प्रशंसा करते हैं | praise |
| जाही | जिसकी | whom |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.142
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 150
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 150, 150
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।