बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
स्वायंभू मनु अरु सतरूपा। जिन्ह तें भै नरसृष्टि अनूपा।।
मूल पाठ
स्वायंभू मनु अरु सतरूपा। जिन्ह तें भै नरसृष्टि अनूपा।।
दंपति धरम आचरन नीका। अजहुँ गाव श्रुति जिन्ह कै लीका।।
स्रोत अभिलेख 1.142 · पुस्तक पृ. 150, 150
भावार्थ
मूल पाठ के बादस्वायम्भुव मनु और [उनकी पत्नी] शतरूपा, जिनसे मनुष्योंकी यह अनुपम सृष्टि हुई, इन दोनों पति-पत्नीके धर्म और आचरण बहुत अच्छे थे। आज भी वेद जिनकी मर्यादाका गान करते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 150 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 स्वायंभू मनु अरु सतरूपा। जिन्ह तें भै नरसृष्टि अनूपा।।
English explanation
AI-drafted meaning: From Svayambhu Manu and Satarupa arose the incomparable human creation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्वायंभू | स्वयंभू ब्रह्मा से उत्पन्न | born of the self-born Brahma |
| मनु | मनु, मानवजाति के आदिपुरुष | Manu, progenitor of humankind |
| अरु | और | and |
| सतरूपा | सतरूपा, मनु की पत्नी | Satarupa, Manu’s wife |
| जिन्ह | जिन दोनों | whom, referring to both |
| तें | से | from |
| भै | उत्पन्न हुई | arose |
| नरसृष्टि | मानव-सृष्टि | human creation |
| अनूपा | अनुपम | incomparable |
2 दंपति धरम आचरन नीका। अजहुँ गाव श्रुति जिन्ह कै लीका।।
English explanation
The couple’s observance of righteousness was excellent; the Vedas still praise their exemplary way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दंपति | पति-पत्नी | the married couple |
| धरम | धर्म का | of righteousness |
| आचरन | आचरण | observance |
| नीका | उत्तम | excellent |
| अजहुँ | आज भी | even now |
| गाव | गुणगान करते हैं | sing the praises of |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| जिन्ह | जिन दोनों | whom, referring to the couple |
| कै | की | whose |
| लीका | आचरण की रीति | exemplary course of conduct |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.142
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 150
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 150, 150
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।