बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निज निज रुख रामहि सबु देखा। कोउ न जान कछु मरमु बिसेषा।।
मूल पाठ
निज निज रुख रामहि सबु देखा। कोउ न जान कछु मरमु बिसेषा।।
भलि रचना मुनि नृप सन कहेऊ। राजाँ मुदित महासुख लहेऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.244 · पुस्तक पृ. 237, 238
भावार्थ
मूल पाठ के बादसबने रामजीको अपनी-अपनी ओर ही मुख किये हुए देखा; परन्तु इसका कुछ भी विशेष रहस्य कोई नहीं जान सका। मुनिने राजासे कहा—रंगभूमिकी रचना बड़ी सुन्दर है। [विश्वामित्र-जैसे नि:स्पृह, विरक्त और ज्ञानी मुनिसे रचनाकी प्रशंसा सुनकर] राजा प्रसन्न हुए और उन्हें बड़ा सुख मिला॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 238 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 निज निज रुख रामहि सबु देखा। कोउ न जान कछु मरमु बिसेषा।।
English explanation
Everyone perceived Rama according to their own disposition; no one understood anything of his particular hidden mystery.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने-अपने | each one's own |
| रुख | भाव या दृष्टि के अनुसार | according to one's disposition or perspective |
| रामहि | राम को | Rama |
| सबु | सबने | everyone |
| देखा | देखा | perceived |
| कोउ | किसी ने | anyone |
| न | नहीं | not |
| जान | जाना | understood |
| कछु | कुछ भी | anything |
| मरमु | गूढ़ रहस्य | hidden mystery |
| बिसेषा | विशेष | particular |
2 भलि रचना मुनि नृप सन कहेऊ। राजाँ मुदित महासुख लहेऊ।।
English explanation
The sage told the king that the arrangement was fine; the king was pleased and felt great happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भलि | सुंदर; अच्छी | fine; lovely |
| रचना | व्यवस्था; सज्जा | arrangement; layout |
| मुनि | मुनि विश्वामित्र ने | the sage Vishvamitra |
| नृप | राजा | the king |
| सन | से | to |
| कहेऊ | कहा | said |
| राजाँ | राजा जनक | King Janaka |
| मुदित | प्रसन्न | pleased |
| महासुख | बहुत सुख | great happiness |
| लहेऊ | पाया | experienced |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.244
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 238
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 237, 238
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।